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मानसरोवर झील में ॐ के दर्शन

मानसरोवर, 28 जुलाई। आंखों या दिमाग में उभरने वाली कोई काल्पनिक तस्वीर इतनी साफ नहीं हो सकती कि इसे पूरी तरह धोखा मान लिया जाए। अगर इस चमत्कार को धोखा मान भी लिया जाए तो सिर्फ किसी एक या दो इंसानों के लिए धोखा हो सकता है लेकिन हर किसी के लिए नहीं। मानसरोवर झील के नीले पानी पर किरणों की झिलमिलाती चादर के बीच ॐ की आकृति उभर आई। कलयुग में यह किसी चमत्कार से कम नही है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के इतिहास में ऐसी कोई घटना पहले देखने को नहीं मिली।

दुनिया की सबसे ऊंची झील में कैलाश पति का स्वरुप ॐ अपने आप उभर आया। जिस किसी ने इस दिव्य नजारे को देखा वो बिना कुछ सोचे-समझे हाथ जोड़कर इस चमत्कार को प्रणाम करने लगा। पौराणिक मान्यता के मुताबिक ऐसा मान लिया जाए कि शिव आज भी मानसरोवर में स्नान करते हैं और इस ॐ का संबंध भी ऐसी ही किसी पौराणिक मान्यता के साथ है। सदियों से शिवभक्त यहां यात्रा के लिए हर साल आते हैं। इस आकृति को यहां पहले कभी भी नहीं देखा गया और ना ही ऐसी कोई घटना कैलाश के इतिहास में दर्ज है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा एक असाधारण तीर्थयात्रा है, जो दुनिया की सबसे दुर्गम पर्वत यात्राओं में शुमार की जाती है। यहां पर वातावरण इंसान की जरूरतों से ठीक प्रतिकूल है। कैलाश का तापमान 12 महीने शून्य के बहुत नीचे रहता है। इंसान के बर्दाश्त से बाहर बर्फीली हवाएं यहां लगातार बहती रहती है। 20 हजार फिट की ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और 1897 किलोमीटर की यात्रा और उस में भी 180 किमी की पैदल यात्रा जीवन के बिल्कुल विपरीत हालात पैदा करती है।

आंखों की सरहद के उस पार तक इंसान तो दूर एक परिंदा भी दिखाई नहीं देता है। दूर तक बस बर्फीली हवाओं की सनसनाहट और सूरज ढलने के बाद गूंजते सन्नाटे ही यहां की पहचान हैं। ऐसे में जल पर ॐ की आकृति चमत्कार ही है। कैलाशधाम में झील तो क्या पत्थर में भी शिव होने का आभास होता है।  


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