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गोविंदगढ़ किला 2260 रुपए के ‘किराए’ पर!
भोपाल, 28 जुलाई। भले ही आपको 22 सौ 60 रुपए में घर किराए पर नहीं मिले लेकिन मप्र सरकार का कमाल देखिए कि उसने सैकड़ों साल पुराना गोविंदगढ़ का ऐतिहासिक किला इतनी ही रकम पर किराए पर दे दिया है।
दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। लेकिन सरकार के इस कदम से न सिर्फ स्थानीय लोगों में गुस्सा है बल्कि विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि सरकार अपनों का हित साधने के लिए प्रदेश की एक के बाद एक ऐतिहासिक इमारतें निजी हाथों में सौंप रही है।
सूचना के अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी के अनुसार, मप्र पर्यटन विकास निगम ने किले को दिल्ली की मैसर्स मैगपी रिसोर्ट प्रायवेट लिमिटेड को 27 हजार 127 रुपए वार्षिक की लीज पर दे दिया है। इसका भुगतान हर साल जून महीने में किया जाएगा। इसे 34 मार्च 2100 तक के लिए लीज पर दिया गया है।
यदि इस रकम को महीने के हिसाब से देखें तो हर महीने कंपनी को सरकार को मात्र 2260 रुपए ही देने पड़ेंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार के पर्यटन विभाग के पास वह कागजात मौजूद नहीं हैं जिससे पता चल सके कि मार्तण्ड सिंह ने किले को विभाग को कब सौंपा था।
दैनिक भास्कर के पास जो कागजात मौजूद हैं, उसमें साफ शब्दों में लिखा है कि महाराजा मार्तण्ड सिंह द्वारा उक्त किले को पर्यटन विभाग को सौंपे जाने संबंधी अभिलेख विभाग में उपलब्ध नहीं हैं।
सरकार ने इस किले को हेरिटेज होटल में परिवर्तित कर लक्जरी हेरिटेज होटल, जिसमें स्वीमिंगपुल, स्पॉ, मल्टी-कुजिन, रेस्टोरेंट, लाइट एंड साउंड शो तथा जल एवं रोमांचक गतिविधियों तथा पर्यटकों के लिए मनोरंजन साधन के लिए दिया है। मप्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंधक संचालक हरि रंजन राव ने बताया कि होटल का वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है। उम्मीद है कि दो सालों में होटल का निर्माण हो जाएगा।
गोविंदगढ़ के किले की बेशकीमती जमीन का बाजार भाव करोड़ों में है। सरकारी कागजों के अनुसार गोविंदगढ़ किले का रकबा 3.617 हेक्टेयर है। इसमें 7436 वर्ग मीटर जमीन पर फोर्ट, जिसमें बेसमेंट 10 हजार वर्गफीट, ग्राउंट फ्लोर 40 हजार वर्गफीट, प्रथमतल 20 हजार वर्ग फीट और द्वितीय दल 10 हजार वर्गफीट पर निर्मित है।
गोविंदगढ़ किले को लेकर कई बार विज्ञापन दिया गया नेकिन लोग नहीं आए। जिसने भी ज्यादा बोली लगाई,उसे दे दिया गया। किले की मरम्मत में ही करोड़ों रूपए लग जाएंगे।
ध्रुव नारायण सिंह,चेयरमेन मप्र पर्यटन विकास निगम
रीवा से 19 किलोमीटर दूर गोविंदगढ़ कस्बे में स्थित गोविंदगढ़ के इस किले से कभी विंध्य राज की सत्ता चलती थी। यह अपने आम और सफेद शेरों के लिए भी दुनियाभर में जाना जाता है। यह किला विशाल झील के किनारे निर्मित है। किसी वक्तयह रीवा के महाराजा का व्यक्तिगत म्यूजिम भी हुआ करता था। दुनिया के पहले सफेद बाघ मोहन को 1951 में जंगलों से पकड़कर इसी किले में रखा गया था।
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