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झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं।
झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं।
झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं।
नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
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नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
नैनीताल झीलों का शहर नैनीताल उत्‍तराखंड का प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थल है। बर्फ से ढ़के पहाड़ों के बीच बसा यह स्‍थान झीलों के घिरा हुआ है। इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। इनमें से सबसे प्रमुख झील नैनी झील है जिसके नाम पर इस जगह का नाम नैनीताल पड़ा। नैनीताल को पहचान दिलाने का श्रेय पी.बेरून नामक व्‍यक्ति को जाता है जिन्‍होंने 1841 में इसकी स्‍थापना की थी। अंग्रेजी शासन काल में यह अंग्रेजों का ग्रीष्‍मकालीन मुख्‍यालय था। तब से लेकर आज तक यह अपना आकर्षण बरकरार रखे हुए है। गर्मियों में यहां बड़ी संख्‍या में सैलानी आते हैं। यहां की झील, मंदिर, बाजार पर्यटकों को लुभाते हैं। छाया - प्रकाश सिंह
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